Krittivasi Ramayan In Hindi |work| «720p»

जब भी भारतीय महाकाव्यों की चर्चा होती है, आमतौर पर लोगों का ध्यान महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित मूल रामायण या फिर तुलसीदास द्वारा लिखित 'रामचरितमानस' (अवधी) पर केंद्रित हो जाता है। लेकिन भारत के पूर्वी क्षेत्र, विशेषकर बंगाल (पश्चिम बंगाल एवं बांग्लादेश) में, एक अन्य रामायण का अद्वितीय स्थान है – ।

तुलसी में 'वात्सल्य' और 'शांत' रस है, वाल्मीकि में 'वीर' और 'शांत', लेकिन कृतिवासी में (करुणा) सर्वाधिक है। सीता के हरण का दृश्य, भरत का मिलाप, और सीता का अंतिम वनवास पाठक की आँखें नम कर देते हैं।

कृत्तिवासी रामायण, जिसे 'श्रीराम पांचाली' के नाम से भी जाना जाता है, बांग्ला साहित्य की पहली महाकाव्यात्मक कृति है। 15वीं शताब्दी में कवि कृत्तिबास ओझा द्वारा रचित यह ग्रंथ केवल वाल्मीकि रामायण का अनुवाद नहीं है, बल्कि यह बंगाल की सांस्कृतिक परंपराओं, लोककथाओं और भक्ति भावना का सुंदर समावेश है। इस लेख में हम कृत्तिवासी रामायण के इतिहास, विशेषताओं, इसकी लोकप्रियता और इसके महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे। krittivasi ramayan in hindi

: इस रामायण की सबसे विशिष्ट और गहरी कथा भगवान राम द्वारा रावण वध से पहले

"हे राम, जिस सीता को तुमने लंका से छीन लिया, उसी सीता को तुम आज त्याग रहे हो। समाज क्या कहेगा, या धर्म क्या कहेगा? मैं वन में जा रही हूँ, लेकिन मैं ही सीता हूँ और मैं ही जानती हूँ कि मैं पवित्र हूँ।" भरत का मिलाप

कृतिवासी रामायण में सीता का पुनः वनवास (उत्तरकांड) वाल्मीकि से भी अधिक पीड़ादायक है। राम एक धोबी के कटु वचन सुनकर सात माह की गर्भवती सीता को वन में छोड़ देते हैं। यहाँ कृतिवास ने सीता के चरित्र को लगभग जैसा सशक्त बना दिया है। वह राम से कहती हैं:

लोक-शैली और काव्यात्मक सरलता [26] आगे के अध्ययन के लिए: विकिपीडिया (Krittivasi Ramayan) krittivasi ramayan in hindi

Unlike the more formal Valmiki Ramayan, Krittibas focused on (devotion) and adapted the epic to suit the cultural sensibilities of Bengal.