– परंपरागत रूप से 12 भावों के लिए 12 अलग-अलग चक्र तालिकाएं बनाई जाती हैं। प्रत्येक चक्र में बताया जाता है कि यदि कोई ग्रह भाव A में है तो उसका प्रभाव भाव B, C, D पर क्या होगा।

24वें वर्ष में 12वां भाव सक्रिय होता है। अगले चक्र:

भृगु चक्र पद्धति (BCP) क्या है?

वैदिक ज्योतिष की एक अत्यंत सरल और प्रभावी तकनीक है। यह पद्धति ऋषि भृगु के सिद्धांतों पर आधारित है, जिसका मुख्य उद्देश्य व्यक्ति की आयु (Age) के अनुसार जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं का सटीक पूर्वानुमान लगाना है।

महर्षि भृगु ने कुछ शाश्वत सूत्र दिए हैं। उदाहरण के तौर पर:

जन्म नक्षत्र एवं जन्म लग्न के नक्षत्र का विशेष महत्व है। भृगु चक्र में, प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरणों (पाद) का अलग-अलग विश्लेषण किया जाता है।

इस तरह के सूक्ष्म विश्लेषण के कारण ही भृगु चक्र को "सुई की नोक पर निदान" कहा जाता है।

| | भृगु चक्र का उपयोग | | :--- | :--- | | आयुष्य निर्धारण | अष्टम भाव, अष्टमेश एवं बिंदु विश्लेषण से मृत्यु का समय और कारण। | | विवाह मिलान | सप्तमेश और शुक्र की स्थिति से विवाह का समय एवं वैवाहिक सुख। | | व्यवसाय/करियर | दशम भाव, दशमेश एवं सूर्य/शनि की स्थिति से पेशे की प्रकृति। | | आर्थिक स्थिति | द्वितीय, पंचम, एकादश भाव एवं गुरु/शुक्र का योग। | | रोग निदान | लग्न, षष्ठ भाव एवं संबंधित ग्रहों से रोग का प्रकार एवं उपचार। | | प्रश्न कुंडली (प्रश्न ज्योतिष) | बिना जन्म समय के, केवल प्रश्न के समय के आधार पर त्वरित उत्तर। |