खालसा राज की स्थापना और प्रशासनिक सुधार
यह पहली बार था जब सिख सत्ता ने अपना स्वतंत्र सिक्का और मोहर जारी किया। मुगल बादशाह बहादुर शाह के लिए यह सीधी चुनौती थी। Rise Of Banda Singh Bahadur Part 2 In Hindi -BEST
मैं आपको के साथ अधिक जानकारी दे सकता हूँ। जब एक साधु योद्धा बना
बंदा सिंह ने एक-एक करके मुगलों के गढ़ ढहाने शुरू कर दिए: Rise Of Banda Singh Bahadur Part 2 In Hindi -BEST
लेकिन ‘Rise Of Banda Singh Bahadur’ का यह सुनहरा दौर ज्यादा दिन नहीं चल सका। दूसरी तरफ, बादशाह बहादुर शाह ने अपनी सारी ताकत और दक्षिण के युद्ध-विशेषज्ञों को इकट्ठा किया। मुगल साम्राज्य के लिए यह ‘मौत का सवाल’ बन गया था।
‘Rise Of Banda Singh Bahadur Part 2 In Hindi -BEST’ श्रृंखला के इस दूसरे भाग में हम उस ऐतिहासिक क्षण की गहराई में उतरेंगे, जब एक साधु योद्धा बना, और एक साम्राज्य की नींव हिल गई। पिछले भाग में हमने देखा कि कैसे माधो दास (पूर्व नाम) ने नांदेड़ में गुरु गोबिंद सिंह जी से दीक्षा ली और ‘बंदा सिंह बहादुर’ बने। अब आगे बढ़ते हैं उस महा-अभियान की ओर, जिसने मुगल सल्तनत के ताबूत में आखिरी कील ठोक दी।
‘Rise Of Banda Singh Bahadur Part 2 In Hindi -BEST’ का सबसे रोमांचक और सबसे दर्दनाक अध्याय है – । सरहिंद वही शहर था, जहाँ के सूबेदार वजीर खान ने गुरु गोबिंद सिंह जी के दो छोटे साहिबजादों (जोरावर सिंह और फतेह सिंह) को जिंदा दीवार में चिनवा दिया था।