Ziyarat E Nahiya In Hindi
ज़ियारत-ए-नाहिया क्या है?
ज़ियारत-ए-नहिया (Ziyarat-e-Nahiya al-Muqaddasa) एक अत्यंत मार्मिक और ऐतिहासिक दस्तावेज़ है, जिसे बारहवें इमाम, इमाम अल-महदी (अ.स.) ziyarat e nahiya in hindi
इस्लाम के इतिहास में कर्बला का वह काला दिन और इमाम हुसैन (अ.स.) की शहादत, हमेशा से इंसानियत के लिए एक सबक और गम का समंदर रहा है। मातम और अज़ा के इस महफ़िल में कई ज़ियारतें (दर्द भरे सलाम) लिखी गई हैं, लेकिन 'ज़ियारत-ए-नाहिया' (Ziyarat-e-Nahiya) का दर्जा बिल्कुल अलग है। यह ज़ियारत न सिर्फ़ एक इबादत है, बल्कि यह एक बेबस आदमी का वह दिलगी पैग़ाम है, जो मौके की नादानी या मजबूरी के कारण कर्बला नहीं जा सका। जिसे बारहवें इमाम
** ziyarat e nahiya ka paath**
इसकी शुरुआत हज़रत आदम (अ.स.) से लेकर पैगंबर मोहम्मद (स.अ.व.व.) तक सभी प्रमुख नबियों को सलाम भेजकर की जाती है। इस ज़ियारत के महत्व
यहाँ ज़ियारत के शुरुआती और अंतिम भाग का हिंदी अनुवाद प्रस्तुत है। पूरा पाफ काफी लंबा है (करीब 15-20 मिनट)।
आइए, इस ज़ियारत के महत्व, उसके मरतबे और उसकी भावनाओं को समझते हैं।